श्री भागवत संदर्भ ग्रंथ विश्वगुरु जी द्वारा रचित श्रीमद्भागवत महापुराण पर आधारित एक अभूतपूर्व तत्त्वज्ञान का एक अद्वितीय ग्रंथ है। यह 6 भागों में है इसलिए इसे श्री षट् संदर्भ भी कहते हैं। GBPS संस्थापक अध्यक्ष कृष्णतत्त्ववेत्ता श्री तेजस्वी दास जी ने इस जटिल एवं अद्वितीय ग्रंथ को गोलोक धाम प्राप्ति (रागानुगाभावोत्थ कृष्ण प्रेम) के इच्छुक साधकों के लिए अपने प्रवचन श्रृंखला के माध्यम से सरल एवं सुबोध किया है। जब तक साधक को तत्त्वज्ञान के ग्रंथ श्री भागवत संदर्भ का ज्ञान नहीं होगा, तब तक साधक रागानुगा साधन भक्ति का अधिकारी नहीं बन सकता।
पहले चार संदर्भ में सम्बन्ध तत्त्व, पाँचवें संदर्भ में अभिधेय तत्त्व और छठे संदर्भ में मुख्य रूप से प्रयोजन तत्त्व का ज्ञान है।
सम्बन्ध तत्त्व
जिस परमेश्वर के साथ प्रत्येक जीव का, भौतिक जगत का, आध्यात्मिक जगत का नित्य एवं अविच्छेद्य सम्बन्ध हो, उन परमेश्वर को सम्बन्ध तत्त्व कहते हैं।
अभिधेय तत्त्व
जिस साधन के द्वारा सम्बन्ध तत्त्व (श्रीकृष्ण) की प्राप्ति की जाती है, उसे अभिधेय तत्त्व कहते हैं।
प्रयोजन तत्त्व
जिस उद्देश्य या लक्ष्य को लेकर श्रीकृष्ण की भक्ति की जाती है, उस उद्देश्य को प्रयोजन तत्त्व कहते हैं।