एकादशी- 27 मई 2026 पारण समय 5:26 am to 7:56 am तथा 11 जून 2026 पारण समय 5:25 am to 9:48 am
एकादशी- 27 मई 2026 पारण समय 5:26 am to 7:56 am तथा 11 जून 2026 पारण समय 5:25 am to 9:48 am
एकादशी- 27 मई 2026 पारण समय 5:26 am to 7:56 am तथा 11 जून 2026 पारण समय 5:25 am to 9:48 am
एकादशी- 27 मई 2026 पारण समय 5:26 am to 7:56 am तथा 11 जून 2026 पारण समय 5:25 am to 9:48 am
एकादशी- 27 मई 2026 पारण समय 5:26 am to 7:56 am तथा 11 जून 2026 पारण समय 5:25 am to 9:48 am
एकादशी- 27 मई 2026 पारण समय 5:26 am to 7:56 am तथा 11 जून 2026 पारण समय 5:25 am to 9:48 am
एकादशी- 27 मई 2026 पारण समय 5:26 am to 7:56 am तथा 11 जून 2026 पारण समय 5:25 am to 9:48 am
एकादशी- 27 मई 2026 पारण समय 5:26 am to 7:56 am तथा 11 जून 2026 पारण समय 5:25 am to 9:48 am

GBPS की जानकारीगीता भागवत प्रचार सेवा ट्रस्ट वृन्दावन

गीता भागवत प्रचार सेवा ट्रस्ट वृन्दावन की स्थापना कृष्णतत्त्ववेत्ता श्री तेजस्वी दास जी के द्वारा बलराम पूर्णिमा के पावन अवसर पर सन् 2016 में वृन्दावन में की गई |

इस संस्था के शरणास्पद आचार्य विश्वगुरु श्रीलजीव गोस्वामी पाद जी है |

यह एक आध्यात्मिक संस्था है जिसमें गीता - भागवत का ज्ञान विश्वगुरु श्रीलजीव गोस्वामी पाद जी के ग्रंथों (श्री भागवत संदर्भ और श्री गोपाल चम्पू) के अनुसार दिया जाता है |

GBPS चैतन्य महाप्रभु द्वारा प्रवर्तित गौड़ीय सम्प्रदाय की एक शाखा है | इसके उपास्य तत्त्व राधाकृष्ण है |

साधन भक्ति के रूप में रागानुगा भक्ति को मानव जीवन के परमलक्ष्य (गोलोक/व्रजप्रेम) की प्राप्ति का उपाय बताया गया है |

GBPS प्रचार प्रारूप

शिक्षागुरु कृष्णतत्त्ववेत्ता श्री तेजस्वी दास जी द्वारा

साधना
साध्य
साधक
साधन

GBPS प्रचार रूपी साधना

पुनर्कथन

प्रवचन

सत्संग

कथा

संगोष्ठी

समारोह

सम्मेलन

यात्रा

उत्सव

GBPS प्रचार रूपी साधना का साध्य

श्री गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय तत्त्वाचार्य विश्वगुरु श्रील जीव गोस्वामी पाद जी की शिक्षाओं के अनुसार तत्त्वज्ञ कृष्णभक्त तैयार करना।

GBPS प्रचार रूपी साधना के साधक

कृष्णतत्त्ववेत्ता श्री तेजस्वी दास जी के आज्ञाकारी व निःस्वार्थ वर्त्मप्रदर्शक

GBPS प्रचार रूपी साधना के साधन

  1. व्यक्ति रूपी साधन
    • केंद्रीय कार्यकर्ता
    • क्षेत्रीय कार्यकर्ता
  2. वस्तु रूपी साधन
    • सोशल मीडिया
    • प्रिंट मीडिया
    • डिजिटल मीडिया
    • वैष्णव एवं प्रचार वस्तु
    • प्रसार वस्तु
    • कीर्तन यंत्र
    • ध्वनि विस्तारक यंत्र

GBPS अनुयायी बनने की चरणबद्ध प्रक्रिया

1. गुरुपदाश्रय (प्रथम चरण)

भक्ति मार्ग पर प्रवेश हेतु प्रथम सोपान 'गुरुपदाश्रय' है। कोई भी जिज्ञासु भक्त 'पंचांगी भक्ति' के निम्नलिखित पाँच नियमों का पालन करते हुए गुरुदेव के चरणों का आश्रय प्राप्त कर सकता है:

  • हरिनाम जप: प्रतिदिन न्यूनतम 5 माला 'हरे कृष्ण' महामंत्र का जप करना अनिवार्य है।
  • व्रत पालन: प्रत्येक एकादशी एवं हरिवासर की तिथि पर अन्नमय भोजन का पूर्ण त्याग अनिवार्य है।
  • श्रवण सेवा: प्रतिदिन हमारे आधिकारिक यूट्यूब चैनल GBPS.life अथवा KrishnaBhaktiShiksha के माध्यम से न्यूनतम 15 मिनट श्रीमद्भगवद्गीता या श्रीमद्भागवत का श्रवण अनिवार्य है।
  • आहार एवं आचरण शुद्धि: मांसाहार एवं समस्त प्रकार के नशे का त्याग अनिवार्य है। (लहसुन, प्याज, चाय एवं कॉफी का त्याग स्वैच्छिक है)।
  • नित्य पाठ एवं संकीर्तन: प्रतिदिन श्री राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र, श्री कृष्ण कृपा कटाक्ष स्तोत्र का एक-एक पाठ एवं चतुश्लोकी गीता, चतुश्लोकी भागवत का एक-एक पाठ। प्रत्येक एकादशी एवं हरिवासर पर 15 मिनट का व्यक्तिगत 'हरिनाम संकीर्तन'।

2. शिक्षानुगत्य (द्वितीय चरण)

गुरुपदाश्रय प्राप्त करने के पश्चात, अनुयायी जब भक्ति के बारह (12) नियमों का निष्ठापूर्वक पालन करते हैं, तब वे शिक्षानुगत्य की पात्रता प्राप्त करते हैं।

  1. विश्वगुरु श्रीलजीवगोस्वामीपाद जी को अपना आनुगत्यास्पद आचार्य स्वीकार करना।
  2. शिक्षागुरु की वाणी में गीता-भागवत श्रवण, विशेष रूप से श्रीषट सन्दर्भ व श्री गोपाल चम्पू का अध्ययन।
  3. 16 माला हरिनाम महामन्त्र का दैनिक जप।
  4. एकादशी एवं हरिवासर पर अन्नमय भोजन का त्याग; और निर्धारित वैष्णव तिथियों पर यथा सम्भव अद्ध उपवास।
  5. चार पाप प्रतिबन्धक नियमों का पालन: मांसाहार, नशा, जुआ और अवैध सम्बन्ध निषेध।
  6. प्रतिदिन श्री श्रीराधादामोदर जी को भोग अर्पण कर कृष्णप्रसाद ग्रहण करना।
  7. दैनिक पूजा में स्तोत्र-पाठ, चतुःश्लोकी गीता-भागवत और हरिनाम संकीर्तन का अभ्यास।
  8. कार्तिक मास व पुरुषोत्तम मास में दीपदान, तुलसी आरती, गोपीगीत आदि का अभ्यास।
  9. 10 नामापराध, 6 वैष्णव अपराध और 10 धाम अपराध से बचने का प्रयास।
  10. गीता-भागवत प्रचार सेवा कार्यों में यथा सम्भव वर्त्मप्रदर्शकों, क्षेत्रीय कार्यकारिणी का सहयोग।
  11. एकादशी, हरिवासर व प्रमुख कार्यक्रमों में तिलक, कण्ठीमाला व वैष्णव वेशभूषा धारण करना।
  12. भक्ति नियमों से विचलन की स्थिति में प्राथमिक/द्वित्तीयक वर्त्मप्रदर्शक या शिक्षागुरु को सूचित करना।

विशेष निर्देश: उपर्युक्त 12 भक्तिविषयक नियमों के अतिरिक्त आनुगत्य प्रार्थी (आनुगत्य उपरान्त जीवानुग वैष्णव/वैष्णवी) अन्य समस्त प्रकार के व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, राष्ट्रीय कार्यों व धार्मिक परम्पराओं आदि के निर्वहन के लिए पूर्ण स्वतन्त्र है, उन पर किसी भी प्रकार का कोई प्रतिबन्ध नहीं है।

3. भावानुगत्य (तृतीय चरण)

शिक्षानुगत्य प्राप्त साधक जब गौड़ीय वैष्णव दर्शन व लीला ग्रन्थों — श्री षट्संदर्भ और श्री गोपाल चम्पू — की विधिवत शिक्षा ग्रहण कर लेते हैं, तब वे रागानुगा भक्ति साधना हेतु शिक्षागुरु द्वारा भावानुगत्य प्राप्त करते हैं।