गीता भागवत प्रचार सेवा ट्रस्ट वृन्दावन की स्थापना कृष्णतत्त्ववेत्ता श्री तेजस्वी दास जी के द्वारा बलराम पूर्णिमा के पावन अवसर पर सन् 2016 में वृन्दावन में की गई |
इस संस्था के शरणास्पद आचार्य विश्वगुरु श्रीलजीव गोस्वामी पाद जी है |
यह एक आध्यात्मिक संस्था है जिसमें गीता - भागवत का ज्ञान विश्वगुरु श्रीलजीव गोस्वामी पाद जी के ग्रंथों (श्री भागवत संदर्भ और श्री गोपाल चम्पू) के अनुसार दिया जाता है |
GBPS चैतन्य महाप्रभु द्वारा प्रवर्तित गौड़ीय सम्प्रदाय की एक शाखा है | इसके उपास्य तत्त्व राधाकृष्ण है |
साधन भक्ति के रूप में रागानुगा भक्ति को मानव जीवन के परमलक्ष्य (गोलोक/व्रजप्रेम) की प्राप्ति का उपाय बताया गया है |
GBPS प्रचार प्रारूप
शिक्षागुरु कृष्णतत्त्ववेत्ता श्री तेजस्वी दास जी द्वारा
पुनर्कथन
प्रवचन
सत्संग
कथा
संगोष्ठी
समारोह
सम्मेलन
यात्रा
उत्सव
श्री गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय तत्त्वाचार्य विश्वगुरु श्रील जीव गोस्वामी पाद जी की शिक्षाओं के अनुसार तत्त्वज्ञ कृष्णभक्त तैयार करना।
कृष्णतत्त्ववेत्ता श्री तेजस्वी दास जी के आज्ञाकारी व निःस्वार्थ वर्त्मप्रदर्शक
भक्ति मार्ग पर प्रवेश हेतु प्रथम सोपान 'गुरुपदाश्रय' है। कोई भी जिज्ञासु भक्त 'पंचांगी भक्ति' के निम्नलिखित पाँच नियमों का पालन करते हुए गुरुदेव के चरणों का आश्रय प्राप्त कर सकता है:
गुरुपदाश्रय प्राप्त करने के पश्चात, अनुयायी जब भक्ति के बारह (12) नियमों का निष्ठापूर्वक पालन करते हैं, तब वे शिक्षानुगत्य की पात्रता प्राप्त करते हैं।
विशेष निर्देश: उपर्युक्त 12 भक्तिविषयक नियमों के अतिरिक्त आनुगत्य प्रार्थी (आनुगत्य उपरान्त जीवानुग वैष्णव/वैष्णवी) अन्य समस्त प्रकार के व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, राष्ट्रीय कार्यों व धार्मिक परम्पराओं आदि के निर्वहन के लिए पूर्ण स्वतन्त्र है, उन पर किसी भी प्रकार का कोई प्रतिबन्ध नहीं है।
शिक्षानुगत्य प्राप्त साधक जब गौड़ीय वैष्णव दर्शन व लीला ग्रन्थों — श्री षट्संदर्भ और श्री गोपाल चम्पू — की विधिवत शिक्षा ग्रहण कर लेते हैं, तब वे रागानुगा भक्ति साधना हेतु शिक्षागुरु द्वारा भावानुगत्य प्राप्त करते हैं।