भगवान् श्रीचैतन्य महाप्रभु श्री श्रीराधा कृष्ण के संयुक्त अवतार है एवं श्री गौड़ीय सम्प्रदाय के प्रवर्तक है जो कि भगवती भागीरथी के पुनीत तट पर पश्चिम बंगाल के श्री नवद्वीप धाम में विक्रमी सम्वत् 1542 सन् 1486 ई. में फाल्गुनी पूर्णिमा के दिन प्रकट हुए हैं।
दिव्य स्वरूप
ब्रजेन्द्रनंदन श्रीकृष्ण ही श्रीमती राधिका के भाव और कांति को अंगीकार कर श्री चैतन्य महाप्रभु के रूप में प्रकट हुए है।
भविष्यवाणी
पृथिवीते आछे यत नगरादि ग्राम।
सर्वत्र प्रचार हइबे मोर नाम ।।
श्री चैतन्य महाप्रभु की भविष्यवाणी है कि शीघ्र ही पृथ्वी के नगर-नगर, ग्राम-ग्राम में उनका प्रचार होगा।
महत्वपूर्ण जानकारी
स्वयं भगवान श्रीचैतन्य महाप्रभु
GBPS Trust, Vrindavan