GBPS शुद्ध कृष्णभक्ति के प्रचार-प्रसार हेतु समर्पित है। हमारी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सारमयी भागवत कथा: इसमें श्रीमद्भागवत के सभी 12 स्कन्धों के सार और भागवत के 3 सिद्धांतों का मुख्य रूप से विवेचन किया जाता है।
विस्तारमयी भागवत कथा:
इसमें भागवत के किसी एक विशिष्ट स्कन्ध को विस्तार से सुनाया जाता है ।
(प्रति स्कंध प्रति सप्ताह)
(दशम स्कंध सप्त सप्ताह)
अतिविस्तारमयी भागवत कथा: इसके अंतर्गत भागवत के किसी एक विशेष प्रकरण अथवा अध्याय पर विस्तारपूर्वक विवेचना की जाती है।
सर्वविस्तारमयी भागवत कथा: यह अत्यंत सूक्ष्म व्याख्यात्मक शैली है, जहाँ भागवत के न्यूनतम एक और अधिकतम सात श्लोकों के माध्यम से संपूर्ण भागवत के सिद्धांतों को समाहित किया जाता है।
श्री ब्रज 84 कोस धाम यात्रा:
GBPS धाम यात्रा एवं कथा कमेटी द्वारा प्रतिवर्ष ब्रज 84 कोस दर्शन यात्रा का आयोजन कृष्णतत्त्ववेत्ता श्री तेजस्वी दास जी के सान्निध्य में किया जाता है । जिसमें ब्रज के मुख्य 12 वनों,अनेक उपवनों,प्रसिद्ध मंदिरों एवं श्रीकृष्ण की मुख्य लीला स्थलों का दर्शन करवाया जाता है। इस यात्रा में यात्रियों को दर्शन लाभ के साथ ब्रज की महिमा श्रवण का लाभ भी प्राप्त होता है ।
इसके अतिरिक्त प्रति वर्ष हरि के किसी न किसी धाम जैसे श्रीअयोध्या, श्रीजगन्नाथ पुरी, श्रीद्वारिका और श्री नवद्वीप धाम जैसे दिव्य स्थलों पर दर्शन यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का विशेष आयोजन किया जाता है।
सेवा भाव: ये सभी यात्राएँ 'नो प्रॉफिट - नो लॉस' (No Profit No Loss) के सिद्धांत पर आधारित हैं, जिसका एकमात्र उद्देश्य धाम की महिमा को उजागर करना और भक्ति साधना है।
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से आषाढ़ शुक्ल दशमी तक भगवान जगन्नाथ की भव्य नव-दिवसीय रथयात्रा आयोजित की जाती है। रथयात्रा दिवस ( आषाढ़ शुक्ल द्वितीया) के पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र जी और सुभद्रा जी के विग्रहों को तीन सुसज्जित रथों पर आरूढ़ कर नगर भ्रमण (विहार) कराया जाता है।
भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुँचाना ही हमारा ध्येय है । GBPS में नियम है-No Condition-No Demand for preaching अर्थात् GBPS के वक्ताओं द्वारा गीता-भागवत सत्संग और श्रीमद्भागवत कथामृत नो कंडीशन-नो डिमाण्ड के आधार पर सुनाए जाते हैं।
GBPS में शिक्षानुगत्य प्राप्त अनुयायी गौड़ीय वैष्णव दर्शन का तत्त्वज्ञान प्राप्त करने हेतु कृष्णतत्त्ववेत्ता श्री तेजस्वी दास जी के मुखारविंद से 'श्री षट्संदर्भ' और 'श्री गोपाल चम्पू' जैसे दिव्य ग्रंथों का श्रवण करते हैं ।